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रविवार, 23 अगस्त 2020

The Prime Minister of India

प्रधानमंत्री (The Prime Minister)

संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री का पद अत्यन्त महत्वपूर्ण है, क्योंकि राष्ट्रपति केवल नाममात्र का प्रधान है, जबकि सारी शक्तियाँ प्रधानमंत्री में निहित होती है। जो मंत्रिपरिषद् निर्माण कार्य एवं उसका संचालन कार्य संभालता है। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद् की आधारशिला है, क्योंकि जब प्रधानमंत्री की किसी कारणवश निधन होने या त्यागपत्र देने पर सम्पूर्ण मंत्रिपरिषद् स्वतः भंग हो जाती है।

1. प्रधानमंत्री की नियुक्ति- संविधान के अनुच्छेद. 75(1) के तहत् प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। राष्ट्रपति लोकसभा द्वारा चुने गये नेता को ही प्रधानमंत्री पर नियुक्त करता है। चाहे वही किसी भी सदन का सदस्य हो। परन्तु प्रधानमन्त्री पद हेतु लोकसभा का सदस्य होने की योग्यता रखना आवश्यक हो। अब तक में हुए प्रधानमंत्रियों में से इंदिरा गांधी(1966), देवगौड़ा(1996), तथा मनमोहन सिंह(2004 और 2009) राज्यसभा के सदस्य थे। जबकि ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद हेतु निम्न सदन (हाउस ऑफ़ कामन्स) का सदस्य होना चाहिए। कोई भी व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नही है, वह प्रधानमंत्री नियुक्त हो सकता है परन्तु उसे 6 माह के भीतर उसे किसी भी सदन की सदस्यता ग्रहण करना आवश्यक है। यदि इस अवधि के भीतर वह सदन का सदस्य नही बन पाता है, तो उसे अपने पद इस्तीफा देना पड़ेगा।

कुछ परिस्थितियों राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति हेतु स्वविवेक से करने का अवसर मिलता है। यथा-

·        जब लोकसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न प्राप्त हो। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति सबसे बड़े दल या गठबन्धन के नेता को प्रधानमन्त्री नियुक्त कर सकता है। भारत में पहली बार 1979 में तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने चौधरी चरण सिंह को, विवेकीय शक्ति का प्रयोग कर प्रधानमंत्री नियुक्त किया था।

·        जब बहुमत वाले दल में कोई निश्चित नेता न हो अर्थात जब दो समान रुप से प्रभावशाली नेता हो।

·        जब प्रधानमंत्री की अचानक मृत्यु हो जाय और कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी न हो।

·        जब राष्ट्रपति लोकसभा भंग कर कुछ समय के लिए दूसरे व्यक्ति को नियुक्त कर दे।

·        लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने पर।

2. प्रधानमंत्री की पदावधि- प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त अपना पद धारण करेंगें। और वह तब तक अपने पद पर बना रह सकता है। जब तक उसे लोकसभा का विश्वास प्राप्त हो। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर भी उसे त्यागपत्र देना पड़ता है। और यदि वह त्यागपत्र नही देता तो राष्ट्रपति उसे पदच्युत कर सकता है।

3. प्रधानमंत्री के अधिकार और कार्य- संविधान के तहत् कार्यपालिका की सारी शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है, जो वह मन्त्रीपरिषद् के माध्यम से करता है। किन्तु मन्त्रीपरिषद् का प्रधान प्रधानमन्त्री होता है। और प्रधानमन्त्री ही भारतीय शासन प्रणाली का सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी होता है, प्रधानमन्त्री के निम्नलिखित कार्य हैः

मन्त्रिपरिषद् के सम्बन्ध में-

·        वह मन्त्रियों की नियुक्ति हेतु राष्ट्रपति से सिफारिश करता है। और राष्ट्रपति उन्हें नियुक्त करता है।

·        वह मंत्रियों को विभिन्न मंत्रालय आवण्टित करता है और उनमें फेरबदल भी करता है।

·        वह किसी मन्त्री को त्यागपत्र देने या राष्ट्रपति को उसे बर्खास्त करने की सलाह दे सकता है।

·        वह मंत्रिपरिषद् की बैठक की अध्यक्षता करता है। तथा उनके निर्णयों को प्रभावित करता है।

·        वह सभी मंत्रियों की गतिविधियों को नियंत्रित, निर्देशित करता है।

·        वह पद से त्यागपत्र देकर मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर सकता है।

राष्ट्रपति के सम्बन्ध में-

·        वह राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद् के बीच संवाद की मुख्य कड़ी है। (अनुच्छेद-78)

1.     संघ के कार्यकलाप के विधान संबंधी मंत्रिपरिषद् के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को सूचित करता है।

2.     संघीय कार्यकलाप के प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई जानकारी उसे दे

3.     राष्ट्रपति द्वारा अपेक्षा किये जाने पर किसी ऐसे विषय को मंत्रिपरिषद् के समक्ष विचार हेतु रखे, जिस पर किसी मन्त्री विनिश्चय कर दिया हो,किन्तु मन्त्रिपरिषद् ने विचार न किया हो।

·        वह राष्ट्रपति को विभिन्न पदाधिकारियों जैसे- भारत का महान्यायवादी, भारत का नियन्त्रक महालेखा परीक्षक, संघ लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष एवं उसके सदस्यों, चुनाव आयुक्तों, वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं उनके सदस्यों एवं अन्य की नियुक्ति के सम्बन्ध में परामर्श देता है।

·        वह राष्ट्रपति को संसद का सत्र बुलाने एवं सत्रावसान करने सम्बन्धी परामर्श देता है।


         भारत के प्रधानमंत्री

    नाम

      कार्यकाल

जवाहरलाल नेहरु

15/08/1947 - 27/5/1964 (निधन)

गुलजारी लाल नन्दा

27/05/1964 - 9/6/1964 (कार्यवाहक)

लालबहादुर शास्त्री

09/06/1964 - 11/1/1966 (निधन)

गुलजारीलाल नन्दा

11/01/1966 - 24/1/1966 (कार्यवाहक)

इंदिरा गाँधी

24/01/1966 - 24/3/1977

मोरारजी देसाई

24/03/1977 - 28/7/1979

चरण सिंह

28/07/1979 - 14/1/1980

इंदिरा गाँधी

14/01/1980 - 31/10/1984 (निधन)

राजीव गाँधी

31/10/1984 - 2/12/1989

विश्वनाथ प्रताप सिंह

02/12/1989 – 10/11/1990

चन्द्रशेखर

10/11/1990 – 21/06/1991

पी.वी. नरसिंह राव

21/06/1991 – 16/05/1996

अटल बिहारी वाजपेयी

16/05/1996 – 01/06/1996 (16 दिनों हेतु)

एच.डी. देवगौड़ा

01/06/1996 – 21/04/1997

इन्द्रकुमार गुजराल

21/04/1997 – 09/03/1998

अटल बिहारी वाजपेयी

19/03/1998 – 13/10/1999

अटल बिहारी वाजपेयी

13/10/1999 – 22/05/2004

डॉ. मनमोहन सिंह

22/05/2004 – 26/05/2014

श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी

26/05/2014 – 31/05/2019

श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी

31/05/2019  से  अब तक



4.वे मुख्यमंत्री जो प्रधानमंत्री बने- मोरारजी देसाई(महाराष्ट्र), चौधरी चरण सिंह(उत्तर प्रदेश), वी.पी. सिंह(उत्तर प्रदेश), पी.वी. नरसिम्हा राव(आन्ध्र प्रदेश), एच.डी.देवगौड़ा(कर्नाटक) एवं श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी(गुजरात) अपने राज्यों के मुख्यमंत्री बनने के पश्चात् देश के प्रधानमंत्री बने।

उपप्रधानमंत्री(Deputy Prime Minister)-

संविधान में उपप्रधानमंत्री पद का कोई प्रावधान नही है, पर यह विशुद्ध रुप से एक राजनीतिक पद है। अब तक कुल आठ उपप्रधानमन्त्री नियुक्त किये जा चुके है।

             भारत के उपप्रधानमन्त्री

क्र.

उपप्रधानमंत्री

पदावधि

प्रधानमंत्री

1

सरदार वल्लभ भाई पटेल

15/08/1947 – 15/12/1950

जवाहर लाल नेहरु

2

मोरारजी देसाई

13/03/1967 – 19/07/1969

श्रीमती इन्दिरा गांधी

3

जगजीवन राम,चौधरी चरण सिंह

24/01/1979 – 28/07/1979

श्री मोरारजी देसाई

4

वाई.बी.चव्हाण

28/07/1979 – 14/01/1980

चौधरी चरण सिंह

5

चौधरी देवी लाल

02/12/1989 – 01/08/1990

विश्वनात प्रताप सिंह

6

चौधरी देवी लाल

10/11/1990 – 21/06/1991

चन्द्रशेखर सिंह

7

लाल कृष्ण आडवाणी

29/06/2002 – 22/05/2004

अटल बिहारी वाजपेयी

बुधवार, 19 अगस्त 2020

भारत का उपराष्ट्रपति


भारत का उपराष्ट्रपति (The Vice-President of India)


                                 List  of the Indian Vice-Presidents

संविधान के अनुच्छेद-63 के तहत् भारत का उपराष्ट्रपति होगा और अनुच्छेद-64 के तहत् उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा तथा अपने कार्यकाल के दौरान उपराष्ट्रपति कोई लाभ का पद धारण नही कर सकता है। भारत का उपराष्ट्रपति पद अमेरिका के संविधान से लिया गया है। उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के बाद देश का दूसरा सर्वोच्च अधिकारी है।
Ø उपराष्ट्रपति की योग्याताएँ- उपराष्ट्रपति की निम्नलिखित योग्यताएँ है।
1 वह भारत का नागरिक हो।
2 वह 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
3 राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
किन्तु कोई व्यक्ति जो भारत सरकार के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है, तो वह इस पद हेतु निर्वाचित होने के पात्र नही होगा।
उपराष्ट्रपति का निर्वाचन- अनु.66(1) के तहत् उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद दोनों के सभी सदस्यों से  मिलकर गठित होने वाले निर्वाचक मण्डल द्वारा होगा। उपराष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा गुप्त तरीके से होता है। उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में मनोनीत सदस्य भी भाग लेते है, किन्तु विधानसभा के नही। भारत के राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव सम्बन्धि विवाद के मामलें में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय अन्तिम निर्णय होता है।
उपराष्ट्रपति के चुनाव नामांकन के लिए उम्मीदवार के कम से कम 20 प्रस्तावक तथा 20 अनुमोदक होने चाहिए। तथा प्रत्येक उम्मीदवार को भारतीय रिजर्व बैंक में 15,000 रुपये जमानत राशि के रुप में जमा करनी होती है।
Ø उपराष्ट्रपति की पदावधि- संविधान के अनुच्छेद 67 के अनुसार उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। परन्तु वह इससे पहले राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौप सकता है। इसके अतिरिक्त यदि राज्यसभा अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से उसे पदच्युत करने का प्रस्ताव पारित कर दे जिसे लोकसभा का समर्थन प्राप्त हो तो उपराष्ट्रपति को अपना पद छोड़ना पड़ेगा। लेकिन इस प्रस्ताव लाने के 14 दिन पूर्व उपराष्ट्रपति को इसकी सूचना देनी होगी।
Ø शपथ या प्रतिज्ञान- अनुच्छेद 69 के तहत् उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति शपथ दिलाता है। उपराष्ट्रपति निम्नलिखित रूप में शपथ ग्रहण करेगा, यथा- मै......
भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा।
अपने पदीय कर्तव्यों का श्रद्धापर्वक निर्वहन करूँगा।
Ø कार्य एवं शक्तियाँ- उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है, अतः वह राज्यसभा के बैठकों की अध्यक्षता करता है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य नही होता अतः उसे मतदान करने का अधिकार प्राप्त नही है, परन्तु जब मत बराबर की स्थिति हो तो वह निर्णायक मत देता है।
Ø वेतन और भत्ते- संविधान में उपराष्ट्रपति के लिए वेतन एवं भत्ते का प्रावधान नही है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति होता है अतः उसे अनुच्छेद 97 के तहत सभापति का वेतन दिया जाता है। वर्तमान में उपराष्ट्रपति का राज्यसभा के सभापति के रुप में रु.4,00,000($5600) मासिक वेतन है। जो भारत की संचित निधि पर भारित होता है। उपराष्ट्रपति के वेतन और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नही किये जा सकते है। परन्तु जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति पद का संचालन करता है, तब वह सभापति के रुप में कार्य नही करता। तब उसे राषट्रपति के वेतन भत्ते प्रदान किये जाते है।
Ø कार्यवाहक राष्ट्रपति- अनुच्छेद-65 के तहत् उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके कार्यों का संचालन करता है। परन्तु उपराष्ट्रपति की भी अनुपस्थिति में संचालन कार्य उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश संभालता है। ऐसा तब होता है जब राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्यागपत्र, महाभियोग या किसी अन्य कारण से रिक्त हो जाता है। अभी तक एक बार ऐसी स्थिति आयी है जब भारत के मुख्य न्यायाधीश एम. हिदायतुल्ला ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रुप में कार्य किया था।
        

           भारत के उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति

 कार्यकाल

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

1952 से 1962 तक

डॉ जाकिर हुसैन

1962 से 1967 तक

वी. वी. गिरि               

1967 से 1969 तक

गोपाल स्वरुप पाठक

1969 से 1974 तक

बी. डी. जत्ती

1974 से 1979 तक

मोहम्मद हिदायतुल्ला

1979 से 1984 तक

आर. वेंकटरमन

1984 से 1987 तक

डॉ शंकरदयाल शर्मा

1987 से 1992 तक

के. आर नारायणन्

1992 से 1997 तक

कृष्णकान्त

1997 से 2002 तक

भैरों सिंह शेखावत

2002 से 2007 तक

मोहम्मद हामिद अंसारी

2007 से 2017 तक

वैंकेया नायडू

2017 से अब तक



भारत के उपराष्ट्रपतियों सम्बन्धि महत्वपूर्ण तथ्य

Ø भारत के दो राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्ण तथा मोहम्मद हामिद अंसारी को दो कार्यकाल के लिए उपराष्ट्रपति चुना गया था।
Ø दो उपराष्ट्रपति वी. वी. गिरि तथा आर. वेकंटरमण का कार्यकाल से पूर्व ही राष्ट्रपति चुने गये थे।
Ø भारत के उपराष्ट्रपति कृष्णकान्त की मृत्यु उनकी पदावधि के दौरान ही हो गया था।
Ø उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत ने राष्ट्रपति चुनाव हार जाने के कारण, अपना कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व अपना पद त्याग दिया था।
Ø गोपाल स्वरुप पाठक, बी. डी. जत्ती, मोहम्मद हिदायतुल्ला तथा भैरोसिंह शेखावत ऐसे उपराष्ट्रपति हुए जो राष्ट्रपति पद हेतु नही चुने जा सके।
Ø उपराष्ट्रपति के चुनाव में विधानमण्डल के सदस्य भाग नही लेते है।
Ø उपराष्ट्रपति संसद के किसी सदन का या किसी राज्य विधानमण्डल के किसी सदन का सदस्य नही होगा और यदि ऐसा होता है, तो उपराष्ट्रपति को अपने पद ग्रहण की तारीख से वह पद रिक्त कर दिया जायेगा।
Ø संविधान में कार्यवाहक राष्ट्रपति का कोई प्रावधान नही है अतः कभी भी यदि उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाता है, तो किसी को कार्यवाहक उपराष्ट्रपति नही बनाया जाता है।
Ø उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर तुरन्त उपराष्ट्रपति चुनाव करने का प्रावधान है, परन्तु इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नही की गई है। (अनुच्छेद-68(2))
Ø उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापतित्व पद का निर्वहन करता है। उपराष्ट्रपति पद का कोई कार्य नही है, उपराष्ट्रपति केवल राष्ट्रपति पद रिक्ति के समय ही उसके कर्त्तव्यों का निर्वहन करता है और उस समय उसके सभापति का पद निर्वहन उपसभापति संभालता है, परन्तु जब उपसभापति न हो तो राज्यसभा द्वारा चुना गया कोई सदस्य राज्यसभा का संचालन करता है।
Ø डॉ. शंकरदयाल शर्मा निर्विरोध चुने जाने वाले उपराष्ट्रपति है।
भारत एवं अमेरिकी उप-राष्ट्रपतियों की तुलना- भारत के उपराष्ट्रपति का पद अमेरिका के उपराष्ट्रपति मॉडल पर आधारित है।परन्तु इनमें काफी अन्तर है।
अमेरिका का उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर अपने पूर्व राष्ट्रपति के कार्यकाल के शेष अवधि तक उस पद पर बना रहता है, परन्तु भारत में उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रिक्त पद पर शेष कार्यकाल तक नही बना रहता। बल्कि वह एक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रुप में कार्य करता है, जब तक नया राष्ट्रपति पद भार न ग्रहण कर ले।